श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.88.37 
अथाब्रवीत् ततो द्रोणो दुर्योधनममर्षणम्।
दु:शासनं च कर्णं च सर्वानेव च भारतान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रोणाचार्य ने अमर दुर्योधन, दुःशासन, कर्ण तथा अन्य सभी भरतवंशियों से कहा - 37॥
 
At that time, Dronacharya said to the immortal Duryodhana, Dushasan, Karna and all the other Bharatvanshis - 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)