श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.88.34 
इतश्चतुर्दशे वर्षे विनक्ष्यन्तीह कौरवा:।
दुर्योधनापराधेन भीमार्जुनबलेन च॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'आज से चौदहवें वर्ष में दुर्योधन के अपराध के कारण भीम और अर्जुन के पराक्रम से कौरव कुल का नाश हो जाएगा।'
 
'In the fourteenth year from today, due to the crime of Duryodhana, the Kaurava clan will be destroyed by the bravery of Bhima and Arjuna'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)