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mahabharat 2.88.30: गिद्ध, सियार और कौवे आदि मांसाहारी पशु मांस और हड्डियाँ आदि लाकर नगर के मन्दिरों, देववृक्षों, चारदीवारी और अटारियों पर गिराने लगे थे ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.88.30 
प्रत्याहरन्ति क्रव्यादा गृध्रगोमायुवायसा:।
देवायतनचैत्येषु प्राकाराट्टालकेषु च॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
गिद्ध, सियार और कौवे आदि मांसाहारी पशु मांस और हड्डियाँ आदि लाकर नगर के मन्दिरों, देववृक्षों, चारदीवारी और अटारियों पर गिराने लगे थे ॥30॥
 
Carnivorous animals like vultures, jackals and crows had started bringing meat and bones etc. and dropping them on the temples, deity trees, boundary walls and attics of the city. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)