श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.88.23 
हतेषु भारतेष्वाजौ कुरूणां गुरवस्तदा।
एवं सामानि गास्यन्तीत्युक्त्वा धौम्योऽपि गच्छति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
धौम्यजी यह कहकर गए थे कि जब कौरव युद्ध में मारे जाएंगे तो उनके गुरु भी इसी प्रकार भजन गाएंगे।
 
Dhoumyaji had gone saying that when the Kauravas are killed in the war, his Guru too will sing hymns in the same manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)