Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.88.20-21: जिनके अन्याय के कारण आज मैं इस दशा को प्राप्त हुआ हूँ, उनकी पत्नियाँ भी आज से चौदहवें वर्ष में अपने पतियों, पुत्रों और सम्बन्धियों के मारे जाने पर उनके शवों पर लोट-लोटकर विलाप करेंगी और अपने शरीर पर रक्त और धूल लगाकर, केश खोले हुए, अपने सम्बन्धियों को त्यागकर उसी प्रकार हस्तिनापुर में प्रवेश करेंगी।॥20-21॥ | mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत्कृतेऽहमिदं प्राप्ता तेषां वर्षे चतुर्दशे।
हतपत्यो हतसुता हतबन्धुजनप्रिया:॥ २०॥
बहुशोणितदिग्धाङ्गॺो मुक्तकेशॺो रजस्वला:।
एवं कृतोदका भार्या: प्रवेक्ष्यन्ति गजाह्वयम्॥ २१॥
अनुवाद
जिनके अन्याय के कारण आज मैं इस दशा को प्राप्त हुआ हूँ, उनकी पत्नियाँ भी आज से चौदहवें वर्ष में अपने पतियों, पुत्रों और सम्बन्धियों के मारे जाने पर उनके शवों पर लोट-लोटकर विलाप करेंगी और अपने शरीर पर रक्त और धूल लगाकर, केश खोले हुए, अपने सम्बन्धियों को त्यागकर उसी प्रकार हस्तिनापुर में प्रवेश करेंगी।॥20-21॥
'The wives of those due to whose injustice I have reached this condition today, in the fourteenth year from today, will also weep rolling on the dead bodies of their husbands, sons and relatives after being killed and with blood and dust on their bodies, with their hair open, they will abandon their relatives and enter Hastinapur in the same manner.'॥ 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥