श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.88.19 
एकवस्त्रा प्ररुदती मुक्तकेशी रजस्वला।
शोणितेनाक्तवसना द्रौपदी वाक्यमब्रवीत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी के शरीर पर केवल एक वस्त्र था, उसके केश खुले हुए थे, वह रजस्वला थी और उसके वस्त्र रक्त (रक्त) से सने हुए थे। उसने रोते हुए ये बातें कहीं॥19॥
 
Draupadi had only one garment on her body, her hair was open, she was menstruating and her clothes were stained with blood (rajas). She said these things while crying.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)