श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.88.13 
यथा च भीमो व्रजति तन्मे निगदत: शृणु।
बाह्वोर्बले नास्ति समो ममेति भरतर्षभ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अब मैं तुम्हें भीमसेन की चाल का रहस्य बताता हूँ। सुनो! हे भरतश्रेष्ठ! उन्हें इस बात का अभिमान है कि शारीरिक बल में मेरे समान कोई नहीं है।॥13॥
 
Now I will tell you the secret of the way Bhimasena is walking. Listen! O best of the Bharatas! He is proud of the fact that there is no one equal to me in physical strength. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)