Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.88.12: इस भय से कि मैं किसी निर्दोष मनुष्य को भयानक दृष्टि से देखकर भस्म न कर दूँ, पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर अपना मुख ढककर चले जाते हैं ॥12॥ | mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहं जनं निर्दहेयं दृष्ट्वा घोरेण चक्षुषा।
स पिधाय मुखं राजा तस्माद् गच्छति पाण्डव:॥ १२॥
अनुवाद
इस भय से कि मैं किसी निर्दोष मनुष्य को भयानक दृष्टि से देखकर भस्म न कर दूँ, पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर अपना मुख ढककर चले जाते हैं ॥12॥
Fearing that I might turn an innocent man into ashes by looking at him with a terrifying gaze, King Yudhishthira, the son of Pandu, goes covering his face. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥