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mahabharat 2.87.d7: वही द्रौपदी कुमारी कृष्णा, जिसे पहले आकाश में उड़ने वाले प्राणी भी नहीं देख पाते थे, अब सड़क पर चलने वाले आम लोगों को भी दिखाई देने लगी हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.87.d7 
या न शक्या पुरा द्रष्टुं भूतैराकाशगैरपि॥
तामद्य कृष्णां पश्यन्ति राजमार्गगता जना:।
 
 
अनुवाद
वही द्रौपदी कुमारी कृष्णा, जिसे पहले आकाश में उड़ने वाले प्राणी भी नहीं देख पाते थे, अब सड़क पर चलने वाले आम लोगों को भी दिखाई देने लगी हैं।
 
The same Draupadi Kumari Krishna, who even the creatures flying in the sky could not see before, is now being seen by even the common people walking on the road.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)