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mahabharat 2.87.d6: नगर के लोगों ने कहा - हे राजा युधिष्ठिर, जिनके पीछे चार दलों की विशाल सेना चलती थी, आज ऐसे ही जा रहे हैं और उनके पीछे द्रौपदी सहित केवल चारों पाण्डव भाई और पुरोहितगण ही चल रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.87.d6 
जना ऊचु:
यं यान्तमनुयाति स्म चतुरङ्गबलं महत्।
तमेवं कृष्णया सार्धमनुयान्ति स्म पाण्डवा:॥
चत्वारो भ्रातरश्चैव पुरोधाश्च विशाम्पतिम्।
 
 
अनुवाद
नगर के लोगों ने कहा - हे राजा युधिष्ठिर, जिनके पीछे चार दलों की विशाल सेना चलती थी, आज ऐसे ही जा रहे हैं और उनके पीछे द्रौपदी सहित केवल चारों पाण्डव भाई और पुरोहितगण ही चल रहे हैं।
 
The people of the city said - Oh! The king Yudhishthira who used to be followed by a huge army of four divisions during his journey is going like this today and behind him are walking only the four Pandava brothers and the priests along with Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)