Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.87.d17: आज हम अपने खेत, बाग और घर छोड़कर परम धर्मात्मा कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर के साथ चलें और उनके सुख-दुःख को अपना सुख-दुःख समझें।   |   mahabharat अध्याय 2.87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  2.87.d17 
उद्यानानि परित्यज्य क्षेत्राणि च गृहाणि च।
एकदु:खसुखा: पार्थमनुयाम सुधार्मिकम्॥
 
 
अनुवाद
आज हम अपने खेत, बाग और घर छोड़कर परम धर्मात्मा कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर के साथ चलें और उनके सुख-दुःख को अपना सुख-दुःख समझें।
 
Today let us leave our farms, orchards and homes and go with the most virtuous Kunti's son Yudhishthir and consider his joys and sorrows as our own.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)