श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.87.7 
भाविन्यर्थे हि सत्स्त्रीणां वैकृतं नोपजायते।
गुरुधर्माभिगुप्ता च श्रेय: क्षिप्रमवाप्स्यसि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘जब कोई निश्चित घटना घटित होती है, तब पतिव्रता स्त्रियों का मन चिन्ताग्रस्त नहीं होता। तुम अपने उत्तम धर्म से सुरक्षित रहकर शीघ्र ही कल्याण को प्राप्त होगे॥ 7॥
 
‘When something that is bound to happen happens, the minds of virtuous women do not become anxious. You will soon attain welfare by remaining protected by your excellent religion.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)