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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.87.4 
वत्से शोको न ते कार्य: प्राप्येदं व्यसनं महत्।
स्त्रीधर्माणामभिज्ञासि शीलाचारवती तथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'बेटी! तुम्हें इतनी बड़ी समस्या का सामना करके दुःखी नहीं होना चाहिए। तुम स्त्री के कर्तव्यों को जानती हो, शील और सदाचार का पालन करती हो।
 
‘Daughter! You should not grieve on facing such a great problem. You know the duties of a woman, you follow modesty and good conduct.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)