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श्लोक 2.87.36  |
ततो जगाम विदुरो धृतराष्ट्रनिवेशनम्।
तं पर्यपृच्छत् संविग्नो धृतराष्ट्रो जनाधिप:॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| तब विदुर राजा धृतराष्ट्र के महल में गए। उस समय राजा धृतराष्ट्र बहुत चिंतित हुए और उनसे पूछा। |
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| Then Vidur went to the palace of King Dhritarashtra. At that time King Dhritarashtra was very worried and asked him. |
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इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अनुद्यूतपर्वणि द्रौपदीकुन्तीसंवादे एकोनाशीतितमोऽध्याय:॥ ७९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अनुद्यूतपर्वमें द्रौपदीकुन्तीसंवादविषयक उनासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २९ श्लोक मिलाकर कुल ६५ श्लोक हैं) |
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