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mahabharat 2.87.35: चिंता के कारण उनकी एकाग्रता भंग हो गई। उनका मन दुःख से व्याकुल हो रहा था। उन्होंने विदुर को संदेश भेजा कि आप शीघ्र ही मेरे पास आएँ। 35.   |   mahabharat अध्याय 2.87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.87.35 
स चिन्तयन्ननेकाग्र: शोकव्याकुलचेतन:।
क्षत्तु: सम्प्रेषयामास शीघ्रमागम्यतामिति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
चिंता के कारण उनकी एकाग्रता भंग हो गई। उनका मन दुःख से व्याकुल हो रहा था। उन्होंने विदुर को संदेश भेजा कि आप शीघ्र ही मेरे पास आएँ। 35.
 
He lost his concentration due to worrying. His mind was getting restless with grief. He sent a message to Vidur that you should come to me soon. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)