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श्लोक 2.87.3  |
कुन्ती च भृशसंतप्ता द्रौपदीं प्रेक्ष्य गच्छतीम्।
शोकविह्वलया वाचा कृच्छ्राद् वचनमब्रवीत्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| द्रौपदी को जाते देख कुन्ती अत्यन्त व्याकुल हो उठी और बड़ी कठिनाई से शोकपूर्ण वाणी में बोली-॥3॥ |
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| Seeing Draupadi leaving, Kunti became very upset and spoke with great difficulty in a mournful voice -॥ 3॥ |
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