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श्लोक 2.87.12  |
तदवस्थान् सुतान् सर्वानुपसृत्यातिवत्सला।
स्वजमानावदच्छोकात् तत्तद् विलपती बहु॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय कुन्ती का हृदय अपने सभी पुत्रों के प्रति अपार स्नेह से भर गया और वह उन्हें गले लगाकर अत्यंत शोकपूर्ण स्वर में बोली॥12॥ |
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| At that time Kunti's heart was filled with immense affection for all her sons. She embraced them and spoke in a very mournful manner.॥12॥ |
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