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mahabharat 2.87.10: कुन्ती भी शोक से व्याकुल होकर रोती हुई द्रौपदी के पीछे-पीछे कुछ दूर तक वन में गई और वहाँ उसने अपने सभी पुत्रों को देखा, जिनके वस्त्र और आभूषण छीन लिए गए थे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 2.87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 87: द्रौपदीका कुन्तीसे विदा लेना तथा कुन्तीका विलाप एवं नगरके नर-नारियोंका शोकातुर होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.87.10 
तां क्रोशन्तीं पृथा दु:खादनुवव्राज गच्छतीम्।
अथापश्यत् सुतान् सर्वान् हृताभरणवासस:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती भी शोक से व्याकुल होकर रोती हुई द्रौपदी के पीछे-पीछे कुछ दूर तक वन में गई और वहाँ उसने अपने सभी पुत्रों को देखा, जिनके वस्त्र और आभूषण छीन लिए गए थे॥10॥
 
Kunti too, distraught with grief, followed Draupadi weeping and going to the forest for some distance. Then she saw all her sons whose clothes and ornaments had been taken off.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)