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mahabharat 2.86.9: विदुर ने कहा, "भरतवंशी रत्न युधिष्ठिर, मुझसे यह जान लो कि अधर्म से पराजित कोई भी मनुष्य अपनी पराजय से दुःखी नहीं होता।"   |   mahabharat अध्याय 2.86: युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिसे विदा लेना, विदुरका कुन्तीको अपने यहाँ रखनेका प्रस्ताव और पाण्डवोंको धर्मपूर्वक रहनेका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 86: युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिसे विदा लेना, विदुरका कुन्तीको अपने यहाँ रखनेका प्रस्ताव और पाण्डवोंको धर्मपूर्वक रहनेका उपदेश देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.86.9 
विदुर उवाच
युधिष्ठिर विजानीहि ममेदं भरतर्षभ।
नाधर्मेण जित: कश्चिद् व्यथते वै पराजये॥ ९॥
 
 
अनुवाद
विदुर ने कहा, "भरतवंशी रत्न युधिष्ठिर, मुझसे यह जान लो कि अधर्म से पराजित कोई भी मनुष्य अपनी पराजय से दुःखी नहीं होता।"
 
Vidura said, "Yudhishthira, the jewel of the Bharata clan, know from me that no man who is defeated by unrighteousness is sad about his defeat."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)