श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 86: युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिसे विदा लेना, विदुरका कुन्तीको अपने यहाँ रखनेका प्रस्ताव और पाण्डवोंको धर्मपूर्वक रहनेका उपदेश देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.86.8 
यथाऽऽज्ञापयसे विद्वंस्त्वं हि न: परमो गुरु:।
यच्चान्यदपि कर्तव्यं तद् विधत्स्व महामते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
विद्वान्! आप जो आज्ञा देंगे, हम उसे स्वीकार करेंगे; क्योंकि आप हमारे परम गुरु हैं। महात्मन! इसके अतिरिक्त जो कुछ हमारा कर्तव्य है, उसे कृपा करके हमें बताएँ।॥8॥
 
‘Scholar! Whatever you command, we will accept that; because you are our supreme teacher. Great one! Apart from this, please tell us whatever else is our duty.’॥ 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd