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mahabharat 2.86.23: जब तुम वन से सकुशल लौट आओगे, तब मैं यहाँ आकर तुमसे पुनः मिलूँगा। ध्यान रखना कि तुम्हारे पूर्वजन्म की किसी भूल का किसी और को पता न चले॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 2.86: युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिसे विदा लेना, विदुरका कुन्तीको अपने यहाँ रखनेका प्रस्ताव और पाण्डवोंको धर्मपूर्वक रहनेका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 86: युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिसे विदा लेना, विदुरका कुन्तीको अपने यहाँ रखनेका प्रस्ताव और पाण्डवोंको धर्मपूर्वक रहनेका उपदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.86.23 
कृतार्थं स्वस्तिमन्तं त्वां द्रक्ष्याम: पुनरागतम्।
न हि वो वृजिनं किंचिद् वेद कश्चित् पुरा कृतम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब तुम वन से सकुशल लौट आओगे, तब मैं यहाँ आकर तुमसे पुनः मिलूँगा। ध्यान रखना कि तुम्हारे पूर्वजन्म की किसी भूल का किसी और को पता न चले॥ 23॥
 
When you return safely from the forest, I will meet you again when I come here. Make sure that no one else knows about any of your past mistakes.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)