Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.86.16: कल्माषी नदी के तट पर निवास करने वाले महर्षि भृगु ने भी तुम्हें उपदेश देकर आशीर्वाद दिया है। देवर्षि नारदजी सदैव तुम्हारा ध्यान रखते हैं और तुम्हारे पुरोहित धौम्यजी सदैव तुम्हारे साथ रहते हैं॥ 16॥ | mahabharat अध्याय 2.86: युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिसे विदा लेना, विदुरका कुन्तीको अपने यहाँ रखनेका प्रस्ताव और पाण्डवोंको धर्मपूर्वक रहनेका उपदेश देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कल्माषीतीरसंस्थस्य गतस्त्वं शिष्यतां भृगो:।
द्रष्टा सदा नारदस्ते धौम्यस्तेऽयं पुरोहित:॥ १६॥
अनुवाद
कल्माषी नदी के तट पर निवास करने वाले महर्षि भृगु ने भी तुम्हें उपदेश देकर आशीर्वाद दिया है। देवर्षि नारदजी सदैव तुम्हारा ध्यान रखते हैं और तुम्हारे पुरोहित धौम्यजी सदैव तुम्हारे साथ रहते हैं॥ 16॥
Maharishi Bhrigu, who resides on the banks of the river Kalmashi, has also blessed you by giving you advice. Devarshi Naradji always takes care of you and your priest Dhoumyaji is always with you.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥