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वैशम्पायन उवाच
एवं ते पुरुषव्याघ्रा: सर्वे व्यायतबाहव:।
प्रतिज्ञा बहुला: कृत्वा धृतराष्ट्रमुपागमन्॥ ४६॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे राजन! इस प्रकार महाबाहु पाण्डव अनेक वचन देकर राजा धृतराष्ट्र के पास गये।
Vaishmpayana says: O King! In this manner all the mighty-armed Pandavas, having made many promises, went to King Dhritarashtra.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अनुद्यूतपर्वणि पाण्डवप्रतिज्ञाकरणे सप्तसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अनुद्यूतपर्वमें पाण्डवोंकी प्रतिज्ञासे सम्बन्ध रखनेवाला सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥