श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.85.46 
वैशम्पायन उवाच
एवं ते पुरुषव्याघ्रा: सर्वे व्यायतबाहव:।
प्रतिज्ञा बहुला: कृत्वा धृतराष्ट्रमुपागमन्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे राजन! इस प्रकार महाबाहु पाण्डव अनेक वचन देकर राजा धृतराष्ट्र के पास गये।
 
Vaishmpayana says: O King! In this manner all the mighty-armed Pandavas, having made many promises, went to King Dhritarashtra.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अनुद्यूतपर्वणि पाण्डवप्रतिज्ञाकरणे सप्तसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अनुद्यूतपर्वमें पाण्डवोंकी प्रतिज्ञासे सम्बन्ध रखनेवाला सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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