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mahabharat 2.85.45: धर्मराज की आज्ञा से मैं द्रौपदी से प्रेम करता हुआ सम्पूर्ण पृथ्वी को धृतराष्ट्र के पुत्रों से शून्य कर दूँगा; इसमें अधिक समय नहीं लगेगा ॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.85.45 
निदेशाद् धर्मराजस्य द्रौपद्या: पदवीं चरन्।
निर्धार्तराष्ट्रां पृथिवीं कर्तास्मि नचिरादिव॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज की आज्ञा से मैं द्रौपदी से प्रेम करता हुआ सम्पूर्ण पृथ्वी को धृतराष्ट्र के पुत्रों से शून्य कर दूँगा; इसमें अधिक समय नहीं लगेगा ॥ 45॥
 
By the order of Dharmaraja, while loving Draupadi, I shall make the whole earth empty of the sons of Dhritarashtra; this will not take much time. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)