Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.85.43-44: नकुल ने कहा: - जो धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन के भोग विलास में लगे हुए हैं और जिन्होंने इस द्यूतशाला में द्रुपद की पुत्री कृष्णा को कटु वचन कहे हैं तथा जो काल के द्वारा प्रेरित होकर मृत्यु की इच्छा रखते हैं, उन्हें मैं यमलोक का अतिथि बनाऊंगा।   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  2.85.43-44 
नकुल उवाच
सुतेयं यज्ञसेनस्य द्यूतेऽस्मिन् धृतराष्ट्रजै:।
यैर्वाच: श्राविता रूक्षा: स्थितैर्दुर्योधनप्रिये॥ ४३॥
तान् धार्तराष्ट्रान् दुर्वृत्तान् मुमूर्षून् कालनोदितान्।
गमयिष्यामि भूयिष्ठानहं वैवस्वतक्षयम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
नकुल ने कहा: - जो धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन के भोग विलास में लगे हुए हैं और जिन्होंने इस द्यूतशाला में द्रुपद की पुत्री कृष्णा को कटु वचन कहे हैं तथा जो काल के द्वारा प्रेरित होकर मृत्यु की इच्छा रखते हैं, उन्हें मैं यमलोक का अतिथि बनाऊंगा।
 
Nakula said: - I shall make those sons of Dhritarashtra, who are engaged in the pleasures of Duryodhan and who have spoken harsh words to Drupada's daughter Krishna in this gambling hall, and who are driven by time to desire to meet their death, guests of Yamaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)