vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा
»
श्लोक 42
श्लोक
2.85.42
सहदेववच: श्रुत्वा नकुलोऽपि विशाम्पते।
दर्शनीयतमो नॄणामिदं वचनमब्रवीत्॥ ४२॥
अनुवाद
राजन! सहदेव की बात सुनकर पुरुषों में श्रेष्ठ तेजस्वी नकुल ने भी यही बात कही ॥42॥
King! On hearing Sahadeva's words, Nakul, who was the most spectacular among men, also said the same thing. ॥ 42॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas