श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.85.42 
सहदेववच: श्रुत्वा नकुलोऽपि विशाम्पते।
दर्शनीयतमो नॄणामिदं वचनमब्रवीत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राजन! सहदेव की बात सुनकर पुरुषों में श्रेष्ठ तेजस्वी नकुल ने भी यही बात कही ॥42॥
 
King! On hearing Sahadeva's words, Nakul, who was the most spectacular among men, also said the same thing. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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