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mahabharat 2.85.40: आर्य भीमसेन तथा उनके मित्रों ने तुम्हारे विषय में जो वचन दिया है, उसे मैं अवश्य पूरा करूँगा। अपनी रक्षा के लिए तुम जो कुछ कर सको, करो ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.85.40 
यथा चैवोक्तवान् भीमस्त्वामुद्दिश्य सबान्धवम्।
कर्ताहं कर्मणस्तस्य कुरु कार्याणि सर्वश:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
आर्य भीमसेन तथा उनके मित्रों ने तुम्हारे विषय में जो वचन दिया है, उसे मैं अवश्य पूरा करूँगा। अपनी रक्षा के लिए तुम जो कुछ कर सको, करो ॥40॥
 
I will certainly fulfill the promise made by Arya Bhimasena and his friends regarding you. Do whatever you can to save yourself. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)