| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा » श्लोक 4 |
|
| | | | श्लोक 2.85.4  | अद्यैव ते सम्प्रयाता: समैर्वर्त्मभिरस्थलै:।
गुणज्येष्ठास्तथा श्रेष्ठा: श्रेयांसो यद् वयं परै:॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | आज वे पाण्डवों के समान उन्हीं मार्गों से वन में जा रहे हैं, जिन पर आए हुए लोगों की भीड़ के कारण स्थान नहीं बचा है। हम गुण और आयु दोनों दृष्टि से अपने विरोधियों से श्रेष्ठ हैं। अतः हमारा स्थान उनसे बहुत ऊँचा है॥4॥ | | | | ‘Today they are going to the forest on the same paths as the Pandavas, on which there is no space left because of the crowd of people who have come. We are superior to our opponents both in terms of qualities and age. Hence our position is much higher than theirs.॥ 4॥ | |
| | ✨ ai-generated | | |
|
|