श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.85.39 
सहदेव उवाच
अक्षान् यान् मन्यसे मूढ गान्धाराणां यशोहर।
नैतेऽक्षा निशिता बाणास्त्वयैते समरे वृता:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
सहदेव बोले, "हे मूर्ख शकुण, क्षत्रिय कुल के कलंक और गांधार में रहने वाले! तू जिन्हें पासे समझ रहा है, वे वास्तव में पासे नहीं हैं। तूने युद्ध में उन्हीं के रूप में तीखे बाणों का चयन किया है।"
 
Sahadeva said, "Oh foolish Shakuna, who is a disgrace to the Kshatriya clan and who lives in Gandhar! What you are considering as dice are not actually dice. You have chosen sharp arrows in the form of them in the war."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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