Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.85.35: यदि मेरा सत्य विचलित हुआ तो हिमालय अपने स्थान से हिल जाएगा, सूर्य का तेज नष्ट हो जाएगा और चंद्रमा की शीतलता उससे छिन जाएगी (अर्थात् जिस प्रकार हिमालय अपने स्थान से नहीं हिल सकता, सूर्य का तेज नष्ट नहीं हो सकता, चंद्रमा की शीतलता नहीं छीनी जा सकती, उसी प्रकार मेरे वचन भी झूठे नहीं हो सकते)।॥ 35॥ | mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि मेरा सत्य विचलित हुआ तो हिमालय अपने स्थान से हिल जाएगा, सूर्य का तेज नष्ट हो जाएगा और चंद्रमा की शीतलता उससे छिन जाएगी (अर्थात् जिस प्रकार हिमालय अपने स्थान से नहीं हिल सकता, सूर्य का तेज नष्ट नहीं हो सकता, चंद्रमा की शीतलता नहीं छीनी जा सकती, उसी प्रकार मेरे वचन भी झूठे नहीं हो सकते)।॥ 35॥
If my truth is disturbed, then the Himalayas will move from their place, the radiance of the Sun will be destroyed and the coolness of the Moon will be taken away from it (i.e., just as the Himalayas cannot move from their place, the radiance of the Sun cannot be destroyed, the coolness of the Moon cannot be taken away, in the same way my words cannot be false).॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥