श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.85.31 
भीमसेन उवाच
दुर्योधनस्य कर्णस्य शकुनेश्च दुरात्मन:।
दु:शासनचतुर्थानां भूमि: पास्यति शोणितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने कहा, 'यह भूमि निश्चय ही दुर्योधन, कर्ण, दुष्ट शकुनि और चौथे दु:शासन का रक्त पीएगी।
 
Bhimasena said, 'This land will certainly drink the blood of Duryodhana, Karna, the evil-minded Shakuni and the fourth one, Dushasan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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