| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा » श्लोक 27-28 |
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| | | | श्लोक 2.85.27-28  | इदं च भूयो वक्ष्यामि सभामध्ये बृहद् वच:।
सत्यं देवा: करिष्यन्ति यन्नो युद्धं भविष्यति॥ २७॥
सुयोधनमिमं पापं हन्तास्मि गदया युधि।
शिर: पादेन चास्याहमधिष्ठास्यामि भूतले॥ २८॥ | | | | | | अनुवाद | | साथ ही, मैं इस सभा में फिर एक बहुत बड़ी बात कह रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि देवतागण मेरी बात को सत्य सिद्ध करेंगे। जब कौरवों और पाण्डवों का युद्ध होगा, तब मैं अपनी गदा से इस पापी दुर्योधन का वध करूँगा और युद्धभूमि में पड़े हुए इस पापी के सिर को अपने पैरों से कुचल दूँगा।॥ 27-28॥ | | | | Also, I am again saying a very big thing in this gathering. I am sure that the gods will prove my words true. When the war between the Kauravas and the Pandavas will take place, I will kill this sinner Duryodhan with my mace and will trample the head of this sinner lying on the battlefield with my foot.॥ 27-28॥ | |
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