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एवं समीक्ष्यात्मनि चावमानं
नियम्य मन्युं बलवान् स मानी।
राजानुग: संसदि कौरवाणां
विनिष्क्रामन् वाक्यमुवाच भीम:॥ २५॥
अनुवाद
इस प्रकार अपना अपमान होते देख, बलवान और अभिमानी भीमसेन ने किसी प्रकार क्रोध को रोककर राजा युधिष्ठिर के पीछे-पीछे कौरव सभा से बाहर आकर इस प्रकार कहा।
Seeing himself being insulted in this manner, the powerful and proud Bhimasena somehow restrained his anger and came out of the Kaurava assembly following King Yudhishthira, and spoke as follows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥