Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.85.24: यह देखकर भीमसेन ने अपना आधा शरीर पीछे की ओर मोड़ लिया और कहा - "अरे मूर्ख! दु:शासन का रक्त पीने मात्र से मेरा कर्तव्य पूरा नहीं हुआ। मैं शीघ्र ही तुझे तेरे बन्धुओं सहित यमलोक भेजकर तेरे इस उपहास का स्मरण कराऊँगा और तुझे करारा उत्तर दूँगा।"॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.85.24 
नैतावता कृतमित्यब्रवीत् तं
वृकोदर: संनिवृत्तार्धकाय:।
शीघ्रं हि त्वां निहतं सानुबन्धं
संस्मार्याहं प्रतिवक्ष्यामि मूढ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर भीमसेन ने अपना आधा शरीर पीछे की ओर मोड़ लिया और कहा - "अरे मूर्ख! दु:शासन का रक्त पीने मात्र से मेरा कर्तव्य पूरा नहीं हुआ। मैं शीघ्र ही तुझे तेरे बन्धुओं सहित यमलोक भेजकर तेरे इस उपहास का स्मरण कराऊँगा और तुझे करारा उत्तर दूँगा।"॥ 24॥
 
Seeing this, Bhimasena turned his half body backwards and said, "O fool! My duty is not complete by just drinking the blood of Dushasan. I will soon send you along with your relatives to Yamaloka and remind you of this joke of yours and give you a befitting reply."॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)