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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.85.23 
वैशम्पायन उवाच
तस्य राजा सिंहगते: सखेलं
दुर्योधनो भीमसेनस्य हर्षात्।
गतिं स्वगत्यानुचकार मन्दो
निर्गच्छतां पाण्डवानां सभाया:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय, जब पाण्डव सभा भवन से बाहर आये, तब मंदबुद्धि राजा दुर्योधन अत्यन्त प्रसन्न हुआ और भीमसेन का उपहास करने लगा, जो सिंह के समान राजसी चाल से उसकी नकल कर रहे थे।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya, when the Pandavas came out of the assembly hall, the dull-witted king Duryodhan became overjoyed and began mocking Bhimasena, who walked like a lion in a majestic manner, and imitating his gait.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)