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mahabharat 2.85.21: मेरी बात सुनो। यदि यह कुन्तीपुत्र भीमसेन युद्ध में तुम्हारी छाती फाड़कर तुम्हारा रक्त न पी ले, तो इसे पुण्यलोक की प्राप्ति न होगी। 21॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.85.21 
मैव स्म सुकृताँल्लोकान् गच्छेत् पार्थो वृकोदर:।
यदि वक्षो हि ते भित्त्वा न पिबेच्छोणितं रणे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मेरी बात सुनो। यदि यह कुन्तीपुत्र भीमसेन युद्ध में तुम्हारी छाती फाड़कर तुम्हारा रक्त न पी ले, तो इसे पुण्यलोक की प्राप्ति न होगी। 21॥
 
Listen to me. If this son of Kunti, Bhimsen, does not tear your chest in battle and drink your blood, then he will not attain the virtuous world. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)