श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.85.19 
वैशम्पायन उवाच
एवं ब्रुवाणमजिनैर्विवासितं
दु:शासनस्तं परिनृत्यति स्म।
मध्ये कुरूणां धर्मनिबद्धमार्गं
गौर्गौरिति स्माह्वयन् मुक्तलज्ज:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! मृगचर्मधारी भीमसेन को इस प्रकार बोलते देख निर्लज्ज दु:शासन कौरवों के बीच में नाचने लगा, उनका उपहास करता हुआ उन्हें 'हे बैल! हे बैल' कहने लगा। उस समय धर्मराज युधिष्ठिर ने भीम का मार्ग रोक रखा था (अन्यथा वे दु:शासन को जीवित न छोड़ते)।॥19॥
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Seeing Bhimasena wearing deerskin talking like this, the shameless Dushasan started dancing in the midst of the Kauravas, making fun of him and started calling him, 'O bull! O bull'. At that time, Dharmaraja Yudhishthira had blocked Bhima's path (otherwise he would not have left Dushasan alive).॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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