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mahabharat 2.85.15: यह सब सुनकर भीमसेन को बड़ा क्रोध आया। जैसे हिमालय की गुफा में रहने वाला सिंह सियार के पास जाता है, उसी प्रकार वे सहसा दु:शासन के पास गए और क्रोधपूर्वक उसे रोककर जोर से डाँटने लगे॥15॥   |   mahabharat अध्याय 2.85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 85: दु:शासनद्वारा पाण्डवोंका उपहास एवं भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवकी शत्रुओंको मारनेके लिये भीषण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.85.15 
तद् वै श्रुत्वा भीमसेनोऽत्यमर्षी
निर्भर्त्स्योच्चै: संनिगृह्यैव रोषात्।
उवाच चैनं सहसैवोपगम्य
सिंहो यथा हैमवत: शृगालम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह सब सुनकर भीमसेन को बड़ा क्रोध आया। जैसे हिमालय की गुफा में रहने वाला सिंह सियार के पास जाता है, उसी प्रकार वे सहसा दु:शासन के पास गए और क्रोधपूर्वक उसे रोककर जोर से डाँटने लगे॥15॥
 
On hearing all this, Bhimasena became very angry. Just as a lion living in a Himalayan cave goes to a jackal, in the same manner he suddenly went to Dushasan and angrily stopped him and rebuked him loudly.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)