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mahabharat 2.84.23: केवल तेरहवें वर्ष में ही हमें अज्ञात व्यक्ति के रूप में भीड़ में रहना पड़ेगा। हे पुरुषश्रेष्ठ! इस निश्चय के साथ हम जुआ खेलें॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 2.84: सबके मना करनेपर भी धृतराष्ट्रकी आज्ञासे युधिष्ठिरका पुन: जूआ खेलना और हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 84: सबके मना करनेपर भी धृतराष्ट्रकी आज्ञासे युधिष्ठिरका पुन: जूआ खेलना और हारना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.84.23 
त्रयोदशं च वै वर्षमज्ञाता: सजने तथा।
अनेन व्यवसायेन दीव्याम पुरुषर्षभा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
केवल तेरहवें वर्ष में ही हमें अज्ञात व्यक्ति के रूप में भीड़ में रहना पड़ेगा। हे पुरुषश्रेष्ठ! इस निश्चय के साथ हम जुआ खेलें॥ 23॥
 
Only in the thirteenth year will we have to live in a crowd as an unknown person. O best of men! Let us gamble with this determination.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)