श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 84: सबके मना करनेपर भी धृतराष्ट्रकी आज्ञासे युधिष्ठिरका पुन: जूआ खेलना और हारना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.84.20 
युधिष्ठिर उवाच
कथं वै मद्विधो राजा स्वधर्ममनुपालयन्।
आहूतो विनिवर्तेत दीव्यामि शकुने त्वया॥ २०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "शकुने! मुझ जैसा स्वधर्मपालन करने वाला राजा, जुआ खेलने के लिए बुलाए जाने पर कैसे पीछे हट सकता है? इसलिए मैं तुम्हारे साथ जुआ खेल रहा हूँ।"
 
Yudhishthira said, 'Shakune! How could a king like me, who is devoted to the observance of his own Dharma, back out when called for gambling? So I am playing with you.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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