श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 84: सबके मना करनेपर भी धृतराष्ट्रकी आज्ञासे युधिष्ठिरका पुन: जूआ खेलना और हारना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.84.11 
त्रयोदशं च सजने अज्ञाता: परिवत्सरम्।
ज्ञाताश्च पुनरन्यानि वने वर्षाणि द्वादश॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘और हम वहाँ बारह वर्ष तक रहेंगे और लोगों से छिपकर तेरहवाँ वर्ष पूरा करेंगे। और यदि तेरहवें वर्ष में लोगों को दिखाई पड़ गए, तो फिर बारह वर्ष तक वन में रहेंगे।॥11॥
 
‘And we will stay there for twelve years and will complete the thirteenth year by remaining hidden from the people. And if we come to the notice of the people in the thirteenth year, then we will again stay in the forest for twelve years.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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