Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.83.4: 'भरतकुलतिलक! अपने ही दोष से इस कुल को क्लेशरूपी सागर में मत डुबोओ। प्रभु! इन उद्दण्ड बालकों की जो कुछ बात हो, उससे सहमत मत होओ।॥4॥ | mahabharat अध्याय 2.83: गान्धारीकी धृतराष्ट्रको चेतावनी और धृतराष्ट्रका अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा निमज्जी: स्वदोषेण महाप्सु त्वं हि भारत।
मा बालानामशिष्टानामभिमंस्था मतिं प्रभो॥ ४॥
अनुवाद
'भरतकुलतिलक! अपने ही दोष से इस कुल को क्लेशरूपी सागर में मत डुबोओ। प्रभु! इन उद्दण्ड बालकों की जो कुछ बात हो, उससे सहमत मत होओ।॥4॥
‘Bharatkultilak! Do not drown this family in the ocean of troubles due to your own fault. Prabhu! Do not agree with whatever these unruly boys say.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥