Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.83.12: 'जैसा वे चाहें, वैसा ही हो। पाण्डव लौट जाएँ और मेरे पुत्र उनके साथ फिर जुआ खेलें।'॥12॥   |   mahabharat अध्याय 2.83: गान्धारीकी धृतराष्ट्रको चेतावनी और धृतराष्ट्रका अस्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 83: गान्धारीकी धृतराष्ट्रको चेतावनी और धृतराष्ट्रका अस्वीकार करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.83.12 
यथेच्छन्ति तथैवास्तु प्रत्यागच्छन्तु पाण्डवा:।
पुनर्द्यूतं च कुर्वन्तु मामका: पाण्डवै: सह॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'जैसा वे चाहें, वैसा ही हो। पाण्डव लौट जाएँ और मेरे पुत्र उनके साथ फिर जुआ खेलें।'॥12॥
 
'Let it be as they wish. Let the Pandavas return and let my sons gamble with them again.'॥ 12॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अनुद्यूतपर्वणि गान्धारीवाक्ये पञ्चसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अनुद्यूतपर्वमें गान्धारीवाक्यविषयक पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)