Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.83.10: 'तुम्हारी बुद्धि, जो शांति, धर्म और उत्तम आचारों से युक्त थी, अक्षुण्ण रहे। प्रमाद न करो। क्रूर कर्मों से प्राप्त लक्ष्मी नाशवान होती है और मृदु व्यवहार से प्राप्त धन पुत्रों और पौत्रों को प्राप्त होता है।'॥10॥ | mahabharat अध्याय 2.83: गान्धारीकी धृतराष्ट्रको चेतावनी और धृतराष्ट्रका अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शमेन धर्मेण नयेन युक्ता
या ते बुद्धि: सास्तु ते मा प्रमादी:।
प्रध्वंसिनी क्रूरसमाहिता श्री-
र्मृदुप्रौढा गच्छति पुत्रपौत्रान्॥ १०॥
अनुवाद
'तुम्हारी बुद्धि, जो शांति, धर्म और उत्तम आचारों से युक्त थी, अक्षुण्ण रहे। प्रमाद न करो। क्रूर कर्मों से प्राप्त लक्ष्मी नाशवान होती है और मृदु व्यवहार से प्राप्त धन पुत्रों और पौत्रों को प्राप्त होता है।'॥10॥
‘May your intellect, which was filled with peace, religion and good morals, remain intact. Do not be negligent. Lakshmi obtained by cruel deeds is perishable and wealth increased by behaving with tenderness is passed on to the sons and grandsons.'॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥