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mahabharat 2.82.d6: तत्पश्चात, किसी समय अर्जुन स्वयं तीर्थयात्रा पर निकले। उसी यात्रा के दौरान वे नागलोक पहुँचे और परम सुंदरी नागराजकन्या उलूपी के अनुरोध पर उसे विधिपूर्वक अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। फिर, अन्य तीर्थस्थानों का भ्रमण करते हुए, वे दक्षिण की ओर गए और गोदावरी, वेण्णा और कावेरी आदि नदियों में स्नान किया।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  2.82.d6 
तत: कदाचिद् बीभत्सुस्तीर्थयात्रां ययौ स्वयम्।
अथोलूपीं शुभां जातां नागराजसुतां तदा॥
नागेष्ववाप चाग्रॺेषु प्रार्थितोऽथ यथातथम्।
ततो गोदावरीं वेण्णां कावेरीं चावगाहत।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, किसी समय अर्जुन स्वयं तीर्थयात्रा पर निकले। उसी यात्रा के दौरान वे नागलोक पहुँचे और परम सुंदरी नागराजकन्या उलूपी के अनुरोध पर उसे विधिपूर्वक अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। फिर, अन्य तीर्थस्थानों का भ्रमण करते हुए, वे दक्षिण की ओर गए और गोदावरी, वेण्णा और कावेरी आदि नदियों में स्नान किया।
 
Thereafter, Arjun himself went on a pilgrimage at some time. During that journey itself, he reached Naglok and formally accepted the most beautiful Nagarajkanya Ulupi as his wife on her request. Then, while visiting other places of pilgrimage, he went towards the south and took bath in rivers like Godavari, Venna and Kaveri.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)