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mahabharat 2.82.d58: मेरा हृदय अर्जुन से इतना भयभीत है कि अश्व, अर्थ, अज आदि अक्षर मेरे मन में भय उत्पन्न करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d58
 
 
श्लोक  2.82.d58 
अकारादीनि नामानि अर्जुनत्रस्तचेतस:।
अश्वाश्चार्था ह्यजाश्चैव त्रासं संजनयन्ति मे॥
 
 
अनुवाद
मेरा हृदय अर्जुन से इतना भयभीत है कि अश्व, अर्थ, अज आदि अक्षर मेरे मन में भय उत्पन्न करते हैं।
 
My heart is so afraid of Arjun that the names Ashwa, Artha, Aja and other alphabets create terror in my mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)