श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d51-d53
 
 
श्लोक  2.82.d51-d53 
देवदानवयक्षाश्च पिशाचोरगराक्षसा:।
भीष्मद्रोणादय: सर्वे कुरवश्च महारथा:॥
लोके सर्वनृपाश्चैव वीराश्चान्ये धनुर्धरा:।
एते चान्ये च बहव: परिवार्य महीपते॥
एकं पार्थं रणे यत्ता: प्रतियोद्धुं न शक्नुयु:॥
 
 
अनुवाद
देवता, दानव, यक्ष, पिशाच, नाग, राक्षस तथा भीष्म, द्रोण आदि समस्त कौरव, संसार के समस्त महारथी, पृथ्वी के समस्त राजा तथा अन्यान्य धनुर्धर - यदि ये तथा अन्य अनेक वीर पुरुष युद्धभूमि में अकेले अर्जुन को घेरकर पूर्ण सावधानी से खड़े भी हो जाएं, तो भी वे उसका सामना नहीं कर सकते।
 
The Gods, Demons, Yakshas, Vampires, Nagas, Rakshasas and all the Kauravas like Bhishma, Drona etc., all the great warriors of the world, all the kings of the earth and other brave archers - even if these and many other brave men surround Arjuna alone on the battlefield and stand with full caution, they cannot face him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)