Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.82.d43-d45: भारत! जिस प्रकार पूर्वकाल में गरुड़ ने अमृत के लिए देवताओं पर विजय प्राप्त की थी, उसी प्रकार कुन्तीपुत्र अर्जुन ने भी खाण्डव वन के माध्यम से देवताओं को जीतकर अग्निदेव को संतुष्ट किया। इस प्रकार पार्थ ने अपने पराक्रम से अग्निदेव को संतुष्ट किया और उनसे रथ, ध्वजा, अश्व, दिव्यास्त्र, उत्तम गाण्डीव धनुष तथा अक्षय बाणों से भरे दो तरकश प्राप्त किए। इनके अतिरिक्त, उन्होंने मयासुर से अतुलित यश तथा एक सभाभवन भी प्राप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d43-d45
 
 
श्लोक  2.82.d43-d45 
यथा सुपर्ण: सोमार्थं विबुधानजयत् पुरा।
तथा जित्वा सुरान् पार्थस्तर्पयामास पावकम्॥
ततोऽर्जुन: स्ववीर्येण तर्पयित्वा विभावसुम्।
रथं ध्वजं हयांश्चैव दिव्यास्त्राणि सभां च वै॥
गाण्डीवं च धनु:श्रेष्ठं तूणी चाक्षयसायकौ।
एतान्यवाप बीभत्सुर्लेभे कीर्तिं च भारत॥
 
 
अनुवाद
भारत! जिस प्रकार पूर्वकाल में गरुड़ ने अमृत के लिए देवताओं पर विजय प्राप्त की थी, उसी प्रकार कुन्तीपुत्र अर्जुन ने भी खाण्डव वन के माध्यम से देवताओं को जीतकर अग्निदेव को संतुष्ट किया। इस प्रकार पार्थ ने अपने पराक्रम से अग्निदेव को संतुष्ट किया और उनसे रथ, ध्वजा, अश्व, दिव्यास्त्र, उत्तम गाण्डीव धनुष तथा अक्षय बाणों से भरे दो तरकश प्राप्त किए। इनके अतिरिक्त, उन्होंने मयासुर से अतुलित यश तथा एक सभाभवन भी प्राप्त किया।
 
Bharat! Just as Garuda had conquered the gods for Amrit in the past, in the same way Kunti's son Arjuna also conquered the gods and satisfied Agnidev through Khandava forest. In this way, Parth satisfied Agnidev with his prowess and obtained from him a chariot, flag, horse, divine weapons, excellent bow Gandiva and two quivers filled with inexhaustible arrows. Apart from these, he also received unmatched fame and an assembly hall from Mayasura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)