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mahabharat 2.82.d34: यह देखकर पाण्डु नन्दन अर्जुन ने इन्द्र के हर्ष को बढ़ाया और उस अत्यन्त तीव्र पाषाण वर्षा को अपने बाणों से नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  2.82.d34 
सोऽश्मवर्षं महावेगमिषुभि: पाण्डवोऽपि च।
विलयं गमयामास हर्षयन् पाकशासनम्॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर पाण्डु नन्दन अर्जुन ने इन्द्र के हर्ष को बढ़ाया और उस अत्यन्त तीव्र पाषाण वर्षा को अपने बाणों से नष्ट कर दिया।
 
Seeing this, Pandu Nandan Arjun increased the joy of Indra and destroyed that extremely fast stone rain with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)