Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.82.d31-d33: पार्थ ने मनुष्य होते हुए भी देवताओं के स्वामी इंद्र को अपने अस्त्रों से बाँध लिया। तब देवेश्वर अर्जुन पर पत्थरों की वर्षा करने लगे। यह देखकर अर्जुन अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अपने बाणों से इंद्र की पत्थरों की वर्षा रोक दी। तत्पश्चात, चिर-प्रेमी अर्जुन की वीरता की परीक्षा लेने के लिए, भगवान इंद्र ने पत्थरों की वर्षा को पहले से भी अधिक बढ़ा दिया। | mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पार्थ ने मनुष्य होते हुए भी देवताओं के स्वामी इंद्र को अपने अस्त्रों से बाँध लिया। तब देवेश्वर अर्जुन पर पत्थरों की वर्षा करने लगे। यह देखकर अर्जुन अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अपने बाणों से इंद्र की पत्थरों की वर्षा रोक दी। तत्पश्चात, चिर-प्रेमी अर्जुन की वीरता की परीक्षा लेने के लिए, भगवान इंद्र ने पत्थरों की वर्षा को पहले से भी अधिक बढ़ा दिया।
Partha, despite being a human, tied Indra, the lord of the gods, with his weapons. Then Deveshwar started showering stones on Arjuna. Seeing this, Arjuna became extremely angry and with his arrows he stopped Indra's rain of stones. Thereafter, to test the bravery of the ever-loving Arjuna, Lord Indra again increased the stone-rain even more than before.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥